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देखें विडियो : आज देवउठनी एकादशी के दिन भूलकर भी ना करें ये 5 काम, भगवान विष्णु हो सकते है नाराज

कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे देवोत्थान एकादशी, देव उठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी नामों से जानते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने की निंद्रा के बाद जागते हैं। कार्तिक मास की एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु जागते हैं इनके जागने के बाद से सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं। इस बार देवउठनी एकादशी 19 नवंबर को है।

तुलसी विवाह

देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह किया जाता है। इस दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति को कन्या नहीं है और वह जीवन में कन्या दान का सुख प्राप्त करना चाहता है तो वह तुलसी विवाह कर प्राप्त कर सकता है|इस दिन भगवान विष्णु की पूरी निष्ठा और श्रद्धा से पूजा करनी चाहिए। रात के समय घर में अखंड दीप जलाएं और घर की छत पर कुछ दीप जलाएं। कोशिश करें कि इस रात घर का कोई कोना अंधेरा ना हो। ऐसा करने से सुख समृद्धि में वृद्धि होती है।

इस दिन से शुभ और मांगलिक कार्य की शुरू हो जाती है। माना जाता है कि इस दिन व्रत करनेवालों को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। साथ ही जो यह व्रत नहीं कर रहे हैं, उनके लिए भी शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं। माना जाता है कि जो यह नियम पालन नहीं करता, उसे दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है और नरक में स्थान मिलता है। आइए, जानते हैं एकादशी के दिन किन कामों से बचना चाहिए…

नरक में मिलता है स्थान

भगवान विष्णु को एकादशी का व्रत सबसे प्रिय है। पुराणों में बताया गया है कि इस दिन जो व्रत ना रहे हों, उन्हें भी प्याज, लहसुन, मांस, अंडा जैसे तामसिक पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से नरक में स्थान मिलता है।

चावल इसलिए ना करें प्रयोग

शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल या चावल से बनी चीजों के खाने मनाही है। मान्यता है कि इस दिन चावल खाने से प्राणी रेंगनेवाले जीव की योनि में जन्म पाता है। लेकिन द्वादशी को चावल खाने से इस योनि से मुक्ति भी मिल जाती है। भगवान विष्णु और उनके किसी भी अवतारवाली तिथि में चावल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

काम भावना पर रखें नियंत्रण

एकादशी के दौरान ब्रह्मचार्य का पालन करना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से फल ज्यादा मिलता है इसलिए एकादशी के दिन शारीरिक संबंध से परहेज रखना चाहिए।

कलह विवाद से लक्ष्मी होती हैं नाराज

एकादशी के दिन मन को शांत रखें और अपने बुजुर्गों का ध्यान करते रहें। हिंदू धर्म एकादशी को सबसे पवित्र दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन घर में शांति और सद्भाव बनाए रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इसलिए भूलकर भी घर के शुद्ध वातावरण को खराब न होने दें और कलह से बचें।

इस तरह ना व्यर्थ करें

एकादशी का दिन बहुत पवित्र होता है, इसे आप सोने में व्यर्थ ना करें। इस दिन सुबह उठाकर भगवान का नाम लें और उनके मंत्रों का जप करें।

इसलिए हुई थी रावण और कंस की मौत

एकादशी के दिन मदिरा का सेवन करने से बचना चाहिए। मदिरा मनुष्य को अहंकार की ओर ले जाती है। एकादशी तिथि मनुष्य का अहंकार में रहना सही नहीं है। कंस और रावण की मौत अंहकार के कारण ही हुई थी।

घृणा की नजर से देखता है समाज

एकादशी के दिन इंसान को चुगली, चोरी, क्रोध और झूठ नहीं बोलना चाहिए। ऐसा करने से परिवार और समाज में घृणा की नजरों से देखा जाता है। एकादशी के दिन ऐसे कार्य कभी नहीं करना चाहिए, इससे भगवान नाराज होते हैं।

 

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